‘मर्द को दर्द नहीं होता है’।
मुझे हुआ था ना बहुत ज्यादा।
ऐसा लग रहा था कुछ बचा ही नहीं,
या हो गया हूं में आधा।
रोज जैसे जब वो मेरे घर आया,
मुझे लगा ही नहीं था ऐसा कुछ होगा।
पापा, आप को हिम्मत जुटाकर बताया,
तो आपने पूछा समाज क्या सोचेगा।
मुझे डर सिर्फ समाज से था,
अब आप से भी लगने लगा है।
बचपन से तो मैने सब बताया था,
अब ये बताकर गलत सा लगने लगा है।
में लड़का हूं तो क्या हुआ?
मेरे साथ भी तो गलत हुआ है।
मेरे उपर ये बात आएं,
तो समाज चुप सा खड़ा है।
मेरे साथ उत्पीड़न हुआ,
तो क्या में कम मर्द हो गया?
गलती क्या मेरी थी
की मैने उसपर विश्वास रखा?
अगर होता भी में समलैंगिक,
तो क्या आप साथ नहीं देते?
गलत चीज गलत है,
ये आप समाज से क्यों नहीं कहते?
साथ चाहिए मुझे बस आप का,
फिर में दुनिया से लड़ लूंगा।
कहना बेटा में तेरे साथ हूं
फिर में सब सह लूंगा।
-Prachiti Chitale (Kavayitri)
